बुक रिव्यू: भागदौड़ भरी जिंदगी में शांति की तलाश:लौटें गीता की तरफ, प्राचीन ज्ञान की सरल व्याख्या, जो युवाओं को भी समझ में आएगी
किताब का नाम: गीता युवाओं के लिए (‘गीता फॉर द यंग एंड द अर्बन’ का हिंदी अनुवाद) लेखक: नित्यानंद चरण दास प्रकाशक: पेंगुइन अनुवाद: एम. ए. समीर मूल्य: 399 रुपए आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर इंसान कहीं-न-कहीं परेशान और थका हुआ है। ओवरथिंकिंग, गोल्स के पीछे दौड़ने और लगातार व्यस्त रहने की आदत ने लोगों के मन की शांति छीन ली है। कई बार दिल में सवाल उठता है कि क्या सच में यही जीवन है? ऐसे में नित्यानंद चरण दास की किताब ‘गीता युवाओं के लिए’ एक सुकून देने वाली राह दिखाती है। यह किताब भगवद्गीता के गहन ज्ञान को शहर की चकाचौंध, ट्रैफिक जाम और मिडनाइट स्क्रोलिंग जैसी आज की हकीकत से जोड़कर सरल और प्रासंगिक तरीके से पेश करती है। नित्यानंद चरण दास एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक मार्गदर्शक और इस्कॉन के साधु हैं। वे मुंबई के श्री राधा गोपीनाथ मंदिर से जुड़े हैं। नित्यानंद युवाओं को सरल, उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने का मार्गदर्शन देते हैं। वे अब तक कई किताबें लिख चुके हैं। इनमें ’ए मॉन्क्स अल्मनैक’ और ’आइकॉन्स ऑफ ग्रेस’ शामिल हैं, जो प्राचीन वैदिक ज्ञान को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करती हैं। नित्यानंद ने अपनी किताब ‘गीता युवाओं के लिए’ में भगवद्गीता को इतने सरल और व्यावहारिक तरीके से लिखा है कि हर व्यक्ति इसे अपनी जिंदगी में उतार सकता है। किताब का मकसद और अहमियत यह किताब शहर की भागदौड़ और मन की शांति के बीच गीता को एक ब्रिज की तरह पेश करती है। किताब का मकसद युवाओं को इस ओवरव्हेल्मिंग दुनिया में खुद को समझने, मन को शांत रखने और सही दिशा में सोचने की एक प्रैक्टिकल गाइड देना है। नित्यानंद जी धर्म, कर्म और समर्पण जैसे गहरे कॉन्सेप्ट्स को कहानियों के जरिए इतने आसान ढंग से समझाते हैं कि वे हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से सीधे जुड़ जाती हैं। नीचे दिए गए ग्राफिक से किताब के 8 मुख्य सबक और सरल तरीके से समझा जा सकते हैं। किताब चार मुख्य विषयों पर आधारित है। आइए, इन्हें विस्तार से समझते हैं। आधुनिक जीवन और शांति की खोज किताब में नित्यानंद जी बताते हैं कि शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी में मोबाइल नोटिफिकेशन, काम का दबाव और लगातार तुलना जैसी चीजें हमें हर पल डिस्ट्रैक्ट करती रहती हैं। लेकिन हम शांति बाहर ढूंढते रहते हैं। गीता हमें सिखाती है कि जब तक मन शांत नहीं होगा, तब तक कोई भी बाहरी सुविधा हमें सुकून नहीं दे सकती है। यह किताब हमें इनर प्रैक्टिस की ओर ले जाती है। यानी अपने विचारों को समझना, इच्छाओं को कंट्रोल करना, कर्म करते हुए परिणाम की चिंता न करना और हर परिस्थिति में संतुलन बनाए रखना। यही अभ्यास धीरे-धीरे हमें भीतर से स्थिर, मजबूत और शांत बनाता है। कर्म और उद्देश्य: एक्शन विदाउट अटैचमेंट किताब में कर्म योग को जीवन का मूल आधार बताया गया है। नित्यानंद जी समझाते हैं कि हमारा काम अपने कर्तव्य को पूरी ईमानदारी से निभाना है, लेकिन उसके फल को लेकर जरूरत से ज्यादा चिंता नहीं करनी है। यह अध्याय सिखाता है कि जब हम डर, दबाव और अपेक्षाओं के बोझ के बिना कर्म करते हैं, तो हमारा मन हल्का रहता है। इससे फोकस बढ़ता है और काम की क्वालटी भी बेहतर होती है। यही है एक्शन विदाउट अटैचमेंट। यानी प्रयास पूरा करना, लेकिन मन पूरी तरह शांत और फ्री रखना। मन पर नियंत्रण इस चैप्टर में नित्यानंद जी कहते हैं, हमारी पहली सांस और आखिरी सांस के बीच आत्मा की एक यात्रा होती है। इस यात्रा का सबसे बड़ा चैलेंज है मन को समझना और उस पर नियंत्रण पाना। वे बताते हैं कि मन अगर मोह से बंधा रहे, तो वही हमें बेचैनी और दुख की ओर ले जाता है, जबकि वैराग्य हमें भीतर से मुक्त करता है। कहानियों के जरिए नित्यानंद जी समझाते हैं कि गुरु का काम आत्मा को ऊंचाई की ओर ले जाना होता है। जब हम खुद को ईश्वर और सही मार्गदर्शन के हवाले करते हैं, तब हमारा मन शांत होता है और जीवन को देखने का नजरिया बदलने लगता है। सामाजिक जुड़ाव और समर्पण किताब का अंतिम हिस्सा सेवा और कनेक्शन की भावना पर केंद्रित है। नित्यानंद जी कहते हैं, “आध्यात्मिक जीवन अस्वीकृति नहीं, जुड़ाव है।” वे युवाओं को सिखाते हैं कि भले ही शहर की जिंदगी में अकेलापन क्यों न हो, इंसान दूसरों से जुड़कर ही भीतर से मजबूत बनता है। यह अध्याय बताता है कि जब हम अपने संघर्षों को बोझ समझने के बजाय उन्हें एक स्पिरिचुअल प्रैक्टिस की तरह अपनाते हैं, तो यह आसान हो जाता है। नित्यानंद जी समझाते हैं कि जब हम चीजों से चिपकते हैं तो मोह में बंधते हैं। जब हम छोड़ना सीखते हैं तो मुक्त होने लगते हैं। यही मोक्ष का वास्तविक अर्थ है। यह किताब क्यों पढ़नी चाहिए? अगर आप शहरों की भागदौड़ भरी जिंदगी में खोया हुआ सा महसूस करते हैं तो यह किताब आपके लिए है। इसके अलावा ये किताब कुछ और लोगों के लिए भी मददगार साबित हो सकती है। किताब के बारे में मेरी राय ‘गीता युवाओं के लिए’ कोई भारी दार्शनिक ग्रंथ नहीं, बल्कि आधुनिक जीवन के लिए एक गाइड है। नित्यानंद जी का कहानी कहने का अंदाज इतना सुंदर है कि पहली बार गीता पढ़ने वाले भी कनेक्ट फील करते हैं। कुछ जगह दोहराव लगता है, लेकिन मैसेज इतना प्रेरित करने वाला है कि बोरियत नहीं होती है। इसे पढ़ते हुए मुझे लगा जैसे कोई मेंटर बात कर रहा हो। नित्यानंद जी हमें याद दिलाते हैं कि पहली सांस से आखिरी सांस तक आत्मा की यात्रा चल रही है, बस ट्यून इन करें। शहर की चकाचौंध में अगर शांति की तलाश है, तो इस किताब को आज की पढ़ें। यह किताब आपके भीतर निश्चित रूप से कुछ बदलाव लाएगी और आपको बेहतर जिंदगी की ओर लेकर जाएगी। ……………. ये बुक रिव्यू भी पढ़िए बुक रिव्यू- सफलता के लिए जरूरी चार पुरुषार्थ: धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की मॉडर्न व्याख्या, भारतीय दर्शन समझना है तो ये किताब पढ़ें ‘इकिगाई’ किताब से दुनिया भर के लोगों को लंबी और खुशहाल जिंदगी का राज बताने वाले लेखक हेक्टर गार्सिया और फ्रांसेस्क मिरालेस अब भारत की प्राचीनता की ओर मुड़े हैं। उनकी नई किताब ‘चार पुरुषार्थ’ हिंदू दर्शन के उन चार लक्ष्यों पर आधारित है, जिन्हें हर इंसान की जिंदगी का आधार माना जाता है- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। पूरी खबर पढ़िए…
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