बुक रिव्यू: मंत्रों की ध्वनि से मन को सुकून:तनाव, भागदौड़ के बीच शांति की राह, ये किताब सिर्फ बात नहीं करती, रास्ता दिखाती है
किताब: मंत्र साधना (‘मंत्रा मेडिटेशन’ किताब का हिंदी अनुवाद) लेखक: राधिका दास प्रकाशक: पेंगुइन अनुवाद: पल्लवी सिंह मूल्य: 350 रुपए इस भागदौड़ भरी जिंदगी में शोर ज्यादा और सुकून कम है। मोबाइल के नोटिफिकेशन से दिन की शुरूआत होती है और रात तक दिमाग कामों, जिम्मेदारियों व चिंताओं से भरा रहता है। हम छुट्टियों में, नई चीजों में, सफलता में या लोगों के बीच शांति तलाशते हैं। लेकिन क्या वास्तव में सुकून बाहरी दुनिया में है? राधिका दास की किताब ‘मंत्र साधना’ इसी सवाल का जवाब देती है। यह किताब बताती है कि असली सुकून और शांति हमारे भीतर है। मंत्र हमारे भीतर तक पहुंचने का एक सरल माध्यम हैं। राधिका दास मंत्रों को किसी धर्म विशेष का विषय नहीं मानते। उनके अनुसार, मंत्र एक ऐसी पवित्र ध्वनि है, जो मन को भटकाव से निकालकर स्थिरता की ओर ले जाती है। इस किताब की खासियत यही है कि यह आध्यात्मिकता को आधुनिक जीवन से जोड़ती है। लेखक बताते हैं कि मंत्र जाप करने के लिए न आपको अच्छा गायक होना जरूरी है और न ही किसी विशेष धार्मिक परंपरा का अनुयायी होना। जरूरत केवल खुले मन और नियमित अभ्यास की है। लेखक का परिचय राधिका दास दुनिया के जाने-माने कीर्तन आर्टिस्ट, भक्ति योग साधक और आध्यात्मिक वक्ता हैं। पिछले कई वर्षों से वे यूरोप, अमेरिका और एशिया के अलग-अलग देशों में लोगों को मंत्र ध्यान और भक्ति योग की शिक्षा दे रहे हैं। उनका उद्देश्य हजारों साल पुराने वैदिक ज्ञान को आज की पीढ़ी के लिए सरल और प्रासंगिक बनाना है। किताब में वे एक ऐसे साथी की तरह बात करते हैं, जिसने स्वयं इस अभ्यास के जरिए जीवन में बदलाव महसूस किया है। किताब का मूल संदेश ‘मंत्र साधना’ का मूल संदेश है- ’मन को बदलना है, तो उसकी ध्वनि बदलनी होगी।’ लेखक बताते हैं कि हम पूरे दिन अनगिनत आवाजों और विचारों से घिरे रहते हैं। यही आवाजें हमारी भावनाओं, फैसलों और व्यवहार को प्रभावित करती हैं। अगर मन लगातार नकारात्मक विचारों में उलझा रहेगा तो बाहरी सफलताएं भी हमें स्थायी खुशी नहीं दे पाएंगी। मंत्रों का नियमित जाप मन को एक सकारात्मक लय देता है। इससे धीरे-धीरे भीतर की बेचैनी कम होने लगती है। राधिका दास के मुताबिक, मंत्र जाप का उद्देश्य किसी चमत्कार की उम्मीद करना नहीं, बल्कि धीरे-धीरे मन को प्रशिक्षित करना है, ताकि वह तनाव, भय और नकारात्मक विचारों से मुक्त हो सके। किताब के 7 मुख्य सबक ग्राफिक में देखिए- मंत्र-ध्यान सिर्फ ‘धर्म’ तक सीमित नहीं लेखक मंत्र साधना को किसी धार्मिक पहचान तक सीमित नहीं रखते। वे बताते हैं कि मंत्र ध्यान इंसान के मन के लिए है, किसी धर्म के लिए नहीं। चाहे कोई किसी भी देश, संस्कृति या आस्था से जुड़ा हो, वह इस अभ्यास को अपना सकता है। राधिका दास बताते हैं कि मंत्रों का उद्देश्य इच्छाएं पूरी करना नहीं, मन को शांत करना है। मन शांत होने से निर्णय क्षमता बेहतर होती है, रिश्ते मजबूत होते हैं और जीवन को देखने का नजरिया बदलता है। अभ्यास से आता बदलाव सेल्फ-हेल्प की किताबें अक्सर कुछ दिनों में जिंदगी बदलने का दावा करती हैं। लेकिन ‘मंत्र साधना’ ऐसा कोई दावा नहीं करती। राधिका दास बार-बार बताते हैं कि मंत्र कोई जादू नहीं, बल्कि अभ्यास है। जैसे शरीर को मजबूत बनाने के लिए रोज व्यायाम करना पड़ता है, वैसे ही मन को मजबूत बनाने के लिए रोज थोड़ी देर मंत्र ध्यान करना पड़ता है। लेखक जपमाला से मंत्र जाप, बैठने की सही मुद्रा, श्वास पर ध्यान और रोजमर्रा की जिंदगी में मंत्रों को शामिल करने के आसान तरीके भी बताते हैं। प्रेम और सेवा से पूरी होती साधना राधिका दास बताते हैं कि मंत्र साधना का उद्देश्य मन को शांत रखने के साथ अपने भीतर करुणा, प्रेम और सेवा की भावना को जगाना भी है। जब हम अपने सुख-दुख से ऊपर उठकर दूसरों की भलाई के बारे में सोचते हैं, तभी यह साधना पूरी होती है। लेखक का मानना है कि जब हम किसी के साथ अपना समय, सहयोग या स्नेह साझा करते हैं तो खुद भी भीतर से समृद्ध होते हैं। मंत्र साधना के प्रैक्टिकल टिप्स लेखक बार-बार कहते हैं कि शांति पाने के लिए जंगल, आश्रम या पहाड़ों पर जाने की जरूरत नहीं है। कुछ मिनट का नियमित अभ्यास भी मन में बड़ा बदलाव ला सकता है। किताब में सरल आसन, श्वास तकनीक, ध्यान की शुरुआती विधियां और जपमाला से मंत्र जाप करने के तरीके बताए गए हैं। साथ ही कई मंत्रों के साथ QR कोड भी दिए गए हैं, ताकि पाठक सही उच्चारण और लय में उन्हें सुनकर अभ्यास कर सकें। इससे यह किताब आज की युवा पीढ़ी के लिए भी उपयोगी साबित होती है। किताब की सबसे बड़ी ताकत किताब मंत्र के जरिए शांति और सुकून का रास्ता दिखाती है। यह किताब किन्हें पढ़नी चाहिए, ग्राफिक में देखिए- किताब के बारे में मेरी राय ‘मंत्र साधना’ उन किताबों में से है, जिन्हें एक बार पढ़कर अलमारी में नहीं रख दिया जाता। यह ऐसी किताब है, जिसके कई पन्नों पर दोबारा लौटने का मन करता है। इसे पढ़ते हुए महसूस होता है कि लेखक हमें किसी नई चीज पर विश्वास करने के लिए मजबूर नहीं करते, बल्कि अपने भीतर झांकने का अवसर देते हैं। मुझे सबसे अच्छी बात यह लगी कि राधिका दास ने मंत्र साधना को रहस्यवाद या चमत्कार से नहीं जोड़ा। उन्होंने इसे मानसिक अनुशासन, आत्मचिंतन और प्रेम का अभ्यास बताया है। अगर आप तेज रफ्तार जिंदगी के बीच कुछ पल रुककर खुद से जुड़ना चाहते हैं तो यह किताब एक अच्छी शुरुआत हो सकती है। इसकी भाषा सहज है, उदाहरण जीवन से जुड़े हैं और अभ्यास इतने सरल हैं कि कोई भी इन्हें अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना सकता है। ……………… ये बुक रिव्यू भी पढ़िए बुक रिव्यू- जीवन बदलना है तो अपनी भावनाओं को बदलो: दुख, प्रेम गुस्सा- किसी भावना को दबाओ मत, उसे स्वीकारो, समझो, मुक्त हो जाओ जीवन की ज्यादातर परेशानियों की शुरुआत बाहर नहीं, हमारे भीतर से होती है। इसलिए जब तक मन का मैल साफ नहीं होगा, तब तक सुख-सुविधाएं भी स्थायी शांति नहीं दे सकतीं। इसी बात को बेहद सरल और व्यावहारिक ढंग से समझाती है जैन संत मुनिश्री 108 प्रमाणसागरजी की किताब ‘भावना योग- नकारात्मकता का हल’। पूरा रिव्यू पढ़िए…
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