सेहत का विज्ञान- क्या OMAD डाइट से कम होगा वजन:ये है इंटरमिटेंट फास्टिंग का नया तरीका, फॉलो करने से पहले जानें पूरी सच्चाई
वजन घटाने के लिए यूं तो कई तरह की फास्टिंग पॉपुलर हैं। इसी तरह से इन दिनों OMAD यानी ‘वन मील ए डे’ इंटरमिटेंट फास्टिंग तेजी से प्रचलित हो रही है। ऐसे में आज जानते हैं इस नए फास्टिंग के बारे में… और ये भी कि इसके पीछे की साइंस क्या है? सवाल- OMAD डाइट क्या है? जवाब- OMAD यानी ‘वन मील ए डे’ इंटरमिटेंट फास्टिंग का एक तरीका है, जिसमें व्यक्ति दिन की पूरी कैलोरी एक ही मील (लगभग 1–2 घंटे की विंडो) में लेता है और बाकी 22–23 घंटे उपवास करता है। इसका फायदा यह होता है कि इससे कुल कैलोरी अपने-आप कम हो जाती है, जो वजन घटाने में मदद कर सकती है। ज्यादातर लोगों के लिए ओमेड को हफ्ते में 1-2 दिन और ज्यादा से ज्यादा 3 दिन करने की सलाह दी जाती है। सवाल- क्या OMAD से वजन घटता है? जवाब- हां, ओमेड से वजन घट सकता है, लेकिन वजह कैलोरी डेफिसिट है, न कि सिर्फ एक बार खाना। फ्रंटियर इन साइकोलॉजी की एक स्टडी में पाया गया कि जिन लोगों ने अपनी पूरी कैलोरी शाम 5–7 बजे के बीच ली, उनका वजन और बॉडी फैट दिन में तीन बार खाने वालों से थोड़ा ज्यादा घटा। हालांकि जामा नेटवर्क की एक रिसर्च की मानें, तो इसके ज्यादातर फायदे कैलोरी कम करने और फास्टिंग से जुड़े हैं, सिर्फ ओमेड से नहीं। साथ ही अगर प्रोटीन कम और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग न की जाए, तो मसल लॉस का खतरा भी बढ़ सकता है। सवाल- क्या OMAD वजन घटाने में सबसे अच्छा तरीका है? जवाब- नहीं, ओमेड कोई जादुई तरीका नहीं है। अगर आप वही कैलोरी तीन समय के भोजन में भी खाते हैं, तो वजन कम होने का परिणाम लगभग समान होता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ साइंस की एक रिसर्च के मुताबिक, वजन कम होना कैलोरी कम करने पर निर्भर करता है, न कि सिर्फ ओमेड पर। सवाल- क्या यह सभी के लिए सुरक्षित है? जवाब- ओमेड सभी उम्र के लोगों के लिए सुरक्षित नहीं है। यह 18 साल से ऊपर के स्वस्थ लोगों के लिए हो सकती है, जो फास्टिंग सहन कर पाते हैं। लेकिन गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं, 18 साल से कम उम्र के बच्चे, बहुत दुबले या बुजुर्ग लोग, डायबिटीज के मरीज और ईटिंग डिसऑर्डर से जूझ रहे लोगों को इससे बचना चाहिए। अगर कोई ले भी रहा है, तो डाइटिशियन की सलाह से ही लेना चाहिए। सवाल- OMAD का शरीर और सेहत पर क्या असर पड़ सकता है? जवाब- नेशनल लाइब्रेरी ऑफ साइंस की स्टडी में कुछ लोगों में इंसुलिन सेंसिटिविटी और ब्लड प्रेशर में सुधार देखा गया है। लेकिन इसके नुकसान भी संभव हैं, खासकर गलत तरीके से करने पर। एक साथ ज्यादा खाने से ब्लड शुगर स्पाइक्स कर सकता है। साथ ही लगातार ओमेड पर रहने से और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग न करने से थकान, चक्कर, कमजोरी, मूड स्विंग्स, लंबे समय में विटामिन-मिनरल की कमी बढ़ सकती है। रेणु रखेजा जानी-मानी न्यूट्रिशनिस्ट एवं हेल्थ कोच हैं। @consciouslivingtips
Source: Lifestyle