एलिस पेरी की युवा खिलाड़ियों को सलाह:अलग-अलग तरह के खेल खेलें, बेहतर खिलाड़ी के साथ बेहतर इंसान भी बनेंगे
जब 16 साल की एक लड़की 2007 में ऑस्ट्रेलिया की जर्सी पहनकर डार्विन के एक छोटे से मैदान पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने उतरी थी, तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि वही खिलाड़ी एक दिन सदी की सर्वश्रेष्ठ महिला क्रिकेटर चुनी जाएगी। लगभग दो दशक बाद एलिस पेरी के नाम रिकॉर्डों का अंबार है, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि खेल के साथ बना रहा वह रिश्ता है, जिसने उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। 35 वर्षीय ऑलराउंडर पेरी कहती हैं कि उनके करियर का सबसे खूबसूरत पहलू यह रहा कि हर साल कुछ नया सीखने और खुद को बेहतर बनाने का मौका मिला। क्रिकेट लगातार बदलता रहा। खासकर टी20 में नए शॉट्स और नई टेक्निक सीखना उनके लिए चुनौती भी था और आनंद भी। उनके अनुसार, खेल में असली संतोष तब मिलता है, जब आप अपनी सीमाओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं। इंग्लैंड के खिलाफ एशेज टेस्ट भी पेरी की यादों का अहम हिस्सा हैं। खासकर 2017 में नॉर्थ सिडनी ओवल पर लगाया गया दोहरा शतक। वे कहती हैं कि उस पारी की सबसे बड़ी खुशी यह थी कि उनके पिता स्टैंड में बैठकर उसे देख रहे थे। क्रिकेट सिखाने से लेकर हर मैच से पहले बात करने तक, उनके पिता आज भी उनकी सबसे बड़ी ताकत हैं। पेरी अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय परिवार को देती हैं। उनके लिए मां प्रेरणा हैं, पिता मार्गदर्शक और बड़ा भाई सबसे अच्छा दोस्त। वहीं, कप्तानों की बात करें तो मेग लैनिंग की शांत नेतृत्व क्षमता और कठिन परिस्थितियों में फैसले लेने की कला ने उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित किया। नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को सलाह देते हुए पेरी कहती हैं कि सिर्फ एक खेल तक सीमित न रहें। जितने ज्यादा खेल खेलेंगे और जितने ज्यादा अनुभव हासिल करेंगे, उतना बेहतर खिलाड़ी और इंसान बनेंगे। उनके मुताबिक खेल का असली मकसद आनंद है। अगर मजा खत्म हो गया, तो खेल का सबसे खूबसूरत हिस्सा भी खो जाएगा। 2020 वर्ल्ड कप उनका सबसे यादगार लम्हा महिला क्रिकेट के इतिहास की सबसे यादगार तस्वीरों में से एक 2020 टी20 वर्ल्ड कप फाइनल की है, जब मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में 86 हजार से ज्यादा दर्शक मौजूद थे। दिलचस्प बात यह है कि उस मैच में पेरी चोट के कारण नहीं खेल सकीं, लेकिन फिर भी वह इसे अपने करियर के सबसे खास पलों में गिनती हैं। उनके मुताबिक यह सिर्फ एक मैच नहीं था, बल्कि उन सभी खिलाड़ियों और लोगों के संघर्ष का सम्मान था जिन्होंने वर्षों तक महिला क्रिकेट को आगे बढ़ाने के लिए काम किया।
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