सेरेना, लेब्रन जैसे खिलाड़ी बदल रहे उम्र की परिभाषा:स्पोर्ट्स साइंस, डाइट ने बढ़ाया करियर; इस फीफा वर्ल्ड कप में 8 खिलाड़ी 40+ उम्र के
40 साल की उम्र आम लोगों के लिए अक्सर शरीर की सीमाओं का अहसास कराने लगती है, लेकिन खेल की दुनिया में तस्वीर तेजी से बदल रही है। कभी जिस उम्र को खिलाड़ियों के करियर का अंत माना जाता था, अब वही उम्र नई मिसालें गढ़ रही है। इसकी सबसे ताजा तस्वीर विम्बलडन में दिखी, जहां 44 वर्षीय सेरेना विलियम्स ने करीब चार साल बाद सिंगल्स कोर्ट पर वापसी की। 23 ग्रैंड स्लैम सिंगल्स खिताब जीत चुकी सेरेना ओपन एरा में विम्बलडन के मुख्य ड्रॉ में खेलने वाली दूसरी सबसे उम्रदराज महिला खिलाड़ी बनीं। उनकी बड़ी बहन 46 वर्षीय वीनस विलियम्स भी डबल्स में उतर रही हैं। यानी उम्र बढ़ी है, लेकिन चुनौती लेने का जज्बा नहीं। यह बदलाव सिर्फ टेनिस तक सीमित नहीं है। 2026 फीफा वर्ल्ड कप में रिकॉर्ड आठ खिलाड़ी 40 साल या उससे ज्यादा उम्र के रहे। इससे पहले खेले गए सभी वर्ल्ड कप मिलाकर भी इतने 40+ खिलाड़ी नहीं उतरे थे। 41 वर्षीय लुईस हैमिल्टन अब भी फॉर्मूला-1 में पोडियम फिनिश कर रहे हैं, जबकि 41 साल के बास्केटबॉल स्टार लेब्रन जेम्स एनबीए में अब भी अपनी टीम के सबसे अहम खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। 39 वर्षीय लियोनेल मेसी अपने छठे वर्ल्ड कप में 7 गोल कर चुके हैं। इस बड़े बदलाव के पीछे की वजह है खेल विज्ञान। पहले खिलाड़ी केवल अभ्यास पर निर्भर रहते थे, अब उनके साथ न्यूट्रीशन एक्सपर्ट, रिकवरी स्पेशलिस्ट, स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच और डेटा एनालिस्ट की पूरी टीम काम करती है। हर ट्रेनिंग सत्र, शरीर पर पड़ने वाला दबाव, नींद और खानपान तक की निगरानी होती है। अब अनुमान नहीं, बल्कि आंकड़ों के आधार पर तय होता है कि खिलाड़ी कब कितना अभ्यास करेगा और कब आराम करेगा। हालांकि उम्र का असर पूरी तरह खत्म नहीं होता। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि 30 साल की उम्र के बाद हर दशक में मांसपेशियां 3 से 8 प्रतिशत तक कम होने लगती हैं। शरीर को रिकवर होने में ज्यादा समय लगता है और चोट का खतरा भी बढ़ता है। इसलिए अनुभवी खिलाड़ियों का सबसे बड़ा हथियार उनकी समझ बन जाती है। वे जानते हैं कि कब पूरी ताकत लगानी है और कब ऊर्जा बचानी है। सेरेना इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। उन्होंने विम्बलडन में 7 सिंगल्स खिताब जीते हैं, जबकि 11 बार फाइनल खेला है। घास के कोर्ट पर उन्होंने 123 में से 107 मुकाबले जीते हैं। यही अनुभव उन्हें अब भी खतरनाक प्रतिद्वंद्वी बनाता है। खेल अब सिर्फ ताकत का नहीं, विज्ञान और समझ का भी खेल बन चुका है। इसलिए 40 की उम्र अब करियर का अंत नहीं, बल्कि बेहतर तैयारी और अनुभव के दम पर नई शुरुआत की पहचान बनती जा रही है।
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