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भारतीय मूल के अभिराम इंडोनेशिया में बढ़ा रहे क्रिकेट:10 साल में एशिया कप तक पहुंची महिला टीम; जर्सी स्पॉन्सर नहीं फिर भी स्टेडियम बना

इंडोनेशिया के लिए अपने पहले महिला एशिया कप में भारत और पाकिस्तान जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ उतरना आसान नहीं रहा। टीम को ग्रुप-ए में तीनों मैचों में हार मिली, लेकिन उसके लिए टूर्नामेंट तक पहुंचना ही बड़ी उपलब्धि है। करीब एक दशक पहले इंडोनेशिया में क्रिकेट का नाम तक बहुत कम लोग जानते थे। अब देश के 38 में से 21 प्रांतों में पुरुषों और महिलाओं दोनों के स्तर पर क्रिकेट खेला जा रहा है। 17 हजार से ज्यादा द्वीपों में फैले इस देश में करीब दो लाख स्थानीय क्रिकेटरों का नेटवर्क तैयार हो चुका है। क्रिकेट इंडोनेशिया के अध्यक्ष अभिराम सिंह यादव इस बदलाव को देश की बड़ी उपलब्धि मानते हैं। सामाजिक विज्ञान के स्कॉलर रहे अभिराम भारत के यूपी से जुड़े हैं और पेशे से व्यापारी और डिप्लोमेट हैं। वे 2023 से इंडोनेशिया क्रिकेट के अध्यक्ष हैं। उनके मुताबिक, शुरुआत में क्रिकेट को स्कूलों तक पहुंचाना भी मुश्किल था। करीब 12 साल पहले कई स्कूल क्रिकेट को स्वीकार नहीं करते थे, लेकिन अब यही स्कूल इस खेल से जुड़ना चाहते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों के लिए कैंप लगाए जाते हैं और प्रांतों में भी प्रतियोगिताएं होती हैं। इंडोनेशिया में महिला क्रिकेट पर खास फोकस है। 2014 में यहां राष्ट्रीय महिला प्रतियोगिता शुरू हुई। क्रिकेट को इंडोनेशिया के राष्ट्रीय खेल सप्ताह में शामिल किए जाने से खिलाड़ियों को सरकारी सहयोग और नियमित सहायता मिलने लगी। 2019 में उसका पहला आधिकारिक महिला टी20 इंटरनेशनल मैच हुआ। अंडर-19 टीम ने 2022 के पहले महिला अंडर-19 वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई किया और 2023 में जिम्बाब्वे को हराकर बड़ी उपलब्धि हासिल की। इसी साल इंडोनेशिया ने दक्षिण-पूर्व एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल भी जीता। इंडोनेशिया ने क्रिकेट को आगे बढ़ाने के लिए भारत और ऑस्ट्रेलिया से भी मदद ली। महिला टीमों को जयपुर, हिमाचल प्रदेश और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया भेजा गया, ताकि खिलाड़ी वहां की क्रिकेट व्यवस्था और खिलाड़ियों से सीख सकें। 2024 में एशियन क्रिकेट काउंसिल की बैठक बाली में होने के बाद इंडोनेशिया को एसीसी का औपचारिक सदस्य बनाया गया। हालांकि आर्थिक चुनौतियां अभी भी बड़ी हैं। क्रिकेट के लिए प्रायोजक जुटाना मुश्किल है और एशिया कप में इंडोनेशियाई टीम की जर्सी पर कोई प्रायोजक नहीं था। इसके बावजूद क्रिकेट इंडोनेशिया ने बाली में दो मैदान तैयार करने की योजना बनाई है। प्रत्येक में 70 गज की बाउंड्री, नौ पिच, 24 प्रैक्टिस नेट और इनडोर सुविधा होगी। यादव का कहना है कि प्रायोजकों का इंतजार करने के बजाय काम शुरू करना जरूरी है। इंडोनेशिया अब सिर्फ टीम बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहता। उसका लक्ष्य घरेलू टी20 मैचों के जरिए क्रिकेट को आत्मनिर्भर बनाना और ज्यादा से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मुकाबले देश में लाना है। एशिया कप में मिली हार से इंडोनेशिया की यात्रा खत्म नहीं होती। टीम के लिए यह बड़े मंच पर खुद को साबित करने की शुरुआत है। लक्ष्य साफ है- एसोसिएट देश होते हुए भी महिला क्रिकेट में आगे बढ़ना और एक ऐसा सिस्टम तैयार करना, जहां खिलाड़ियों के लिए क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, बल्कि करियर भी बने।

Source: Sports

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