आचार्य तुलसी महान संत थे-सरस्वती

बेंगलूरु. मुनि अर्हतकुमार और मुनि रश्मिकुमार के सान्निध्य में अर्हम भवन में आचार्य तुलसी का 26 वां महाप्रयाण दिवस मनाया गया। सभा अध्यक्ष प्रकाश गांधी व तेयुप अध्यक्ष श्रेयांश गोलछा ने सभी का स्वागत किया। मुनि जयदीपकुमार ने कहा कि आचार्य तुलसी कहते थे कि पहले में मानव हूं और जीवनभर मानव के उत्थान के लिए कार्य करूंगा। ज्ञानशाला के बच्चों ने नाटिका के जरिए आचार्य तुलसी के विभिन्न आयामों को बताया। मुनि प्रियांशु कुमार ने कहा कि आचार्य तुलसी ने दिव्य ज्ञान से संघर्षों का सामना करते हुए जन जन के मानस पर तेरापंथ की छवि कायम की।
स्वामी नारायण नंदा सरस्वती ने कहा की आचार्य तुलसी एक ऐसे संत थे जिन्होंने सिद्धि की प्राप्ति कर ऐसे महान कार्य किए जिनको भुलाया नहीं जा सकता। स्वामी नारायण नंदा ने आचार्य तुलसी पर रचित गीत प्रस्तुत किया। मुनि भरतकुमार ने कहा की अपनी कथनी और करनी में फर्क नहीं रखना चाहिए। गोसेवक नागराज स्वामी ने कन्नड़ भाषा में कहा की गुरुदेव तुलसी ने सर्वधर्म के प्रति समभाव रखते हुए संपूर्ण मानव समाज को नशा मुक्त रहें और आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा दी। मुनि रश्मिकुमार ने कहा कि आचार्य तुलसी की आंखों में एक तेज था अगर वह किसी के सामने अपनी आंखें बड़ी करके एक बार देख लेते तो विरोधियों का साहस वैसे ही क्षीण हो जाता था। मुनि अर्हतकुमार ने कहा कि गुरुदेव अपने आखिरी समय तक सक्रियता और जागरूकता से कार्यकार्य रहे। उनका जीवन पूरा एक ग्रंथ है। उनके बारे में व्याख्या करना सूरज को दीया दिखाने जैसी बात हो जाती है। मुख्य अतिथि राज्यसभा सदस्य लहरसिंह सिरोया ने कहा मेरे यहां तक के सफर में आचार्य तुलसी के दिखाए मार्ग ही मेरी कामयाबी है। विजयनगर विधायक कृष्णप्पा ने कहा में आप सबके लिए सदैव सेवा में तैयार हूं। समाजसेवी महेंद्र मुणोत नें तुलसी नाम की महिमा का वर्णन किया। मंगल कोचर ने आभार जताया। संचालन संयोजक राजेश चावत ने किया।



Source: Dharma & Karma

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