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जरूरत की खबर- घर बैठे दर्ज कर सकते हैं ई–एफआईआर:जानें इसका पूरा प्रोसेस, जरूरी डॉक्यूमेंट्स, ट्रैक और फॉलोअप की प्रक्रिया

किसी भी अपराध के बाद पीड़ित या उसके परिजनों की पहली लड़ाई इंसाफ की नहीं, बल्कि एफआईआर (प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज कराने की होती है। थाने के चक्कर, लंबा इंतजार और कागजी प्रक्रिया लोगों को थका देती है। जबकि कानून में एफआईआर ही वह पहला कदम है, जिसके बिना जांच और न्याय की प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो सकती। हालांकि अब तकनीक ने इस प्रक्रिया को आसान बना दिया है। आज आप घर बैठे अपने मोबाइल या लैपटॉप के जरिये एफआईआर दर्ज करा सकते हैं। इस सुविधा को ई-एफआईआर (इलेक्ट्रॉनिक फर्स्ट इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट) या ऑनलाइन एफआईआर कहा जाता है। खासतौर पर चोरी, गुमशुदगी या छोटे अपराधों के मामलों में ई-एफआईआर आम लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। इससे समय की बचत होती है और पुलिस तक शिकायत दर्ज हो जाती है। इसलिए जरूरत की खबर में ई-एफआईआर के बारे में जानेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: राजेश दंडोतिया, एडिशनल डीसीपी, क्राइम ब्रांच, इंदौर सवाल- ई–एफआईआर क्या होती है? जवाब- ई-एफआईआर (इलेक्ट्रॉनिक फर्स्ट इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट) एक ऐसी सुविधा है, जिसके जरिए लोग घर बैठे ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए थाने जाना जरूरी नहीं है। मोबाइल या कंप्यूटर से ही काम हो जाता है। यह सिस्टम कानून व्यवस्था को डिजिटल और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे लोगों का समय बचता है। भागदौड़ कम होती है और शिकायत जल्दी दर्ज हो जाती है। सवाल- ई-एफआईआर कैसे दर्ज कराई जाती है? जवाब- भारत के अलग-अलग राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में ई-एफआईआर दर्ज करने के लिए ऑनलाइन वेबसाइट या पोर्टल मौजूद हैं। जिसके माध्यम से ई-एफआईआर दर्ज कराई जाती है। इन वेबसाइट/पोर्टल को राज्य या स्थानीय पुलिस चलाती है, जिससे लोग आसानी से ऑनलाइन शिकायत या एफआईआर दर्ज करा सकते हैं। सवाल- किन मामलों में ई-एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है? जवाब- ई-एफआईआर आमतौर पर ऐसे अपराधों के लिए दर्ज कराई जाती है, जो ज्यादा गंभीर नहीं होते हैं, जैसे- साधारण चोरी, वाहन चोरी, ऑनलाइन या साइबर स्कैम, महिलाओं/बच्चों से जुड़े छोटे अपराध। गंभीर अपराध जैसे हत्या, बलात्कार या अपहरण के मामलों में आमतौर पर सीधे पुलिस स्टेशन जाकर एफआईआर दर्ज कराने की सलाह दी जाती है। ध्यान रखें कि ई-एफआईआर किन-किन मामलों में दर्ज होगी, यह राज्य की पुलिस नीति पर निर्भर करता है, इसलिए अंतिम जानकारी के लिए संबंधित राज्य की पुलिस वेबसाइट जरूर देखें। सवाल- ई-एफआईआर दर्ज कराते वक्त किन-किन डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होती है? जवाब- ई-एफआईआर दर्ज करते समय कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट्स या जानकारी देनी पड़ती है। क्या-क्या देना होगा, यह राज्य पर भी निर्भर करता है। साथ ही, यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि मामला किस तरह का है। पॉइंटर्स से समझते हैं- आइडेंटिटी प्रूफ सामान्य तौर पर शिकायतकर्ता की पहचान से जुड़े डॉक्यूमेंट जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट की जरूरत होती है। इसके साथ ही मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी देना होता है, क्योंकि इन्हीं पर ओटीपी, एफआईआर नंबर और आगे की जानकारी भेजी जाती है। चोरी/गुमशुदगी से जुड़े डॉक्यूमेंट्स अगर मामला चोरी या गुमशुदगी से जुड़ा है, तो घटना से संबंधित विवरण देना जरूरी होता है, जैसे तारीख, समय, स्थान और घटना की पूरी डिटेल। कई मामलों में इससे जुड़े डॉक्यूमेंट्स भी अपलोड करने होते हैं, जैसे वाहन चोरी में आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट), गुम हुए सामान का बिल या पहचान से जुड़ा कोई प्रमाण। साइबर क्राइम से जुड़े डॉक्यूमेंट्स साइबर क्राइम या ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में लेन-देन से जुड़े सबूत मांगे जाते हैं, जैसे- बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजैक्शन ID, स्क्रीनशॉट, ई-मेल या मैसेज प्रूफ। सवाल- ई- एफआईआर दर्ज कराने का प्रोसेस क्या है? जवाब- ई-एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया काफी सरल होती है। पॉइंटर्स से पूरा प्रोसेस समझते हैं- राज्य पुलिस की वेबसाइट पर जाएं अपने राज्य की पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट खोलें। ध्यान रखें कि सही और आधिकारिक पोर्टल ही चुनें। रजिस्ट्रेशन/लॉगिन करें अगर नए यूजर हैं तो नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल डालकर रजिस्ट्रेशन करें। मोबाइल पर आए OTP से वेरिफिकेशन पूरा करें। पहले से रजिस्ट्रेशन है तो सीधे लॉगिन करें। ई-एफआईआर ऑप्शन चुनें वेबसाइट पर “नागरिक सेवाएं” या “ई-एफआईआर” सेक्शन में जाएं। वहीं से ई-एफआईआर दर्ज करने का विकल्प चुनें। सारी डिटेल्स भरें अपनी व्यक्तिगत जानकारी भरें जैसे नाम, पता, मोबाइल नंबर, ईमेल। फिर घटना की पूरी जानकारी लिखें कि क्या हुआ, कब हुआ, कहां हुआ और कैसे हुआ। सबमिट करें सारी जानकारी चेक करने के बाद फॉर्म सबमिट करें। सबमिट करते ही आपको एक शिकायत संख्या (रिफरेंस नंबर) मिलेगी। इसे संभालकर रखें। एफआईआर कॉपी डाउनलोड करें पुलिस दी गई जानकारी की जांच करेगी। वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद एफआईआर की कॉपी ईमेल, SMS लिंक या पोर्टल से डाउनलोड की जा सकती है। (नोट- ध्यान रखें कि अलग-अलग राज्यों में प्रक्रिया और स्वीकार किए जाने वाले मामलों में थोड़े अंतर हो सकते हैं, इसलिए ई-एफआईआर दर्ज कराते समय संबंधित राज्य की पुलिस वेबसाइट के निर्देश जरूर पढ़ें) सवाल- ई-एफआईआर को कैसे ट्रैक किया जा सकता है? जवाब- ई-एफआईआर दर्ज कराने के बाद उसे ट्रैक करना काफी आसान होता है। एफआईआर सबमिट करते ही आपको एक एफआईआर नंबर या रजिस्ट्रेशन नंबर मिलता है, जिसे संभालकर रखना जरूरी है। ग्राफिक से ई-एफआईआर को ट्रैक करने का प्रोसेस समझते हैं- सवाल- ई-एफआईआर दर्ज कराने में कितना समय लगता है? जवाब- अगर आपके पास जरूरी जानकारी और डॉक्यूमेंट्स पहले से तैैयार हैं तो ऑनलाइन फॉर्म भरने में 10 से 15 मिनट का समय लगता है। फॉर्म सबमिट करने के बाद पुलिस वेरिफिकेशन करती है। वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद ई-एफआईआर को औपचारिक रूप से दर्ज कर लिया जाता है। सवाल- किन-किन राज्योें में ई-एफआईआर की सुविधा उपलब्ध है? जवाब- दिल्ली, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, उड़ीसा, राजस्थान, उत्तराखंड में ई-एफआईआर की सुविधा दी गई है। सवाल- ई-एफआईआर का निपटारा होने के बाद उसे कैसे क्लोज किया जाता है? जवाब- ई-एफआईआर का निपटारा होने के बाद उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत ही क्लोज किया जाता है। इसमें कोई अलग या ऑटोमैटिक तरीका नहीं होता, बल्कि वही प्रक्रिया अपनाई जाती है जो सामान्य एफआईआर में होती है। जब ई-एफआईआर दर्ज होती है और पुलिस जांच पूरी कर लेती है, तो दो स्थितियां बन सकती हैं। पहली स्थिति अगर जांच में अपराध सही पाया जाता है और आरोपी के खिलाफ सबूत मिलते हैं, तो पुलिस कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करती है। इसके बाद मामला अदालत में चला जाता है और ई-एफआईआर को सिस्टम में ‘जांच पूरी/कोर्ट में लंबित’ जैसी स्थिति में दिखा दिया जाता है। दूसरी स्थिति जांच के दौरान यदि पुलिस को पर्याप्त सबूत नहीं मिलते, मामला गलत साबित हो जाता है, शिकायत वापस ले ली जाती है या गुमशुदगी/चोरी का मामला सुलझ जाता है, तो पुलिस उस केस में क्लोजर रिपोर्ट तैयार करती है। यह रिपोर्ट मजिस्ट्रेट को भेजी जाती है। कोर्ट की मंजूरी मिलने के बाद ही ई-एफआईआर आधिकारिक रूप से क्लोज होती है। कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद पुलिस अपने रिकॉर्ड और ऑनलाइन पोर्टल पर ई-एफआईआर की स्थिति को अपडेट कर देती है, जैसे ‘क्लोज्ड’, ‘डिस्पोस्ड’ या ‘फाइनल रिपोर्ट एक्सेप्टेड।’ शिकायतकर्ता यह स्टेटस ई-एफआईआर पोर्टल या पुलिस वेबसाइट पर FIR नंबर के जरिए देख सकता है। ……………………………………….. जरूरत की ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- शकरकंद में रोडामाइन-बी की मिलावट:FSSAI ने बताया शुद्धता की जांच कैसे करें, चमकदार नहीं, मिट्‌टी वाला ही खरीदें शकरकंद सेहत का खजाना है। 50 ग्राम की एक छोटी सी शकरकंद भी रोज खाएं तो उससे 4 ग्राम फाइबर मिलता है। यह एक न्यूट्रिएंट रिच फूड है, जिसमें विटामिन A, विटामिन C, फाइबर, पोटेशियम और एंटीऑक्सिडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

Source: Lifestyle

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