विचार मंथन : मनुष्य का बचपन सावन की हरियाली है, उसमें चिंता नहीं, विकार नहीं और कर्त्तव्य का बंधन भी नहीं, लेकिन युवावस्था…- डॉ. प्रणव पंड्या
मनुष्य का बचपन सावन की हरियाली है। उसमें चिंता नहीं, विकार नहीं और कर्त्तव्य का…
मनुष्य का बचपन सावन की हरियाली है। उसमें चिंता नहीं, विकार नहीं और कर्त्तव्य का…
परम सन्तोष का अनुभव एक बार सुजाता ने भगवान बुद्ध को खीर दी, भगवान बुद्ध…
सच्चे संन्यासी भगवान का यह कानून है कि हर एक मनुष्य अपनी मिहनत से जीयें।…
मनुष्य इस चिर-दुर्लभ मानव-जीवन को पाकर छोटे-छोटे कर्म फलों के लिये लालायित रहता है, जिस…